कुछ महकी सी कुछ मद्धम सी एक महक अजीब सी आती है,
उस आँगन में ढलते सूरज में ईक खनक अजीब सी आती है,
कुछ चार चाय की प्याली से कुछ ख़ामोशी मिट जाती है,
एक दूजे की उन बातो में रात युही कट जाती है,
उस देख चाय की प्याली को जब याद तुम्हारी आती है,
कुछ आँखे नम हो जाती है
कुछ उमंग अजब सी आती है जब चाय की प्याली आती है,
कुछ महकी सी कुछ मद्धम सी एक महक अजीब सी आती है.....
-सोलंकी मैंडी
उस आँगन में ढलते सूरज में ईक खनक अजीब सी आती है,
कुछ चार चाय की प्याली से कुछ ख़ामोशी मिट जाती है,
एक दूजे की उन बातो में रात युही कट जाती है,
उस देख चाय की प्याली को जब याद तुम्हारी आती है,
कुछ आँखे नम हो जाती है
कुछ उमंग अजब सी आती है जब चाय की प्याली आती है,
कुछ महकी सी कुछ मद्धम सी एक महक अजीब सी आती है.....
-सोलंकी मैंडी
2 comments:
awesome dear :) Well done..
very nice...keep it up:)
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