Sunday, January 15, 2012

चाय की प्याली

कुछ महकी सी कुछ मद्धम सी एक महक अजीब सी आती है,
उस आँगन में ढलते सूरज में ईक खनक अजीब सी आती है,
कुछ चार चाय की प्याली से कुछ ख़ामोशी मिट जाती है,
एक दूजे की उन बातो में रात युही कट जाती है,
उस देख चाय की प्याली को जब याद तुम्हारी आती है,
कुछ आँखे नम हो जाती है
कुछ उमंग अजब सी आती है जब चाय की प्याली आती है,
कुछ महकी सी कुछ मद्धम सी एक महक अजीब सी आती है.....
-सोलंकी मैंडी

2 comments:

Sandy said...

awesome dear :) Well done..

kashish said...

very nice...keep it up:)