सबका मुक्कदर रेत में गड़े सीपियो की तरह है,
एक वीरान बड़ा मैदान दूर दूर तक कुछ दिखाई नहीं देता,
इन सीपियो को न जाने उस पर्बर्देगार ने कहा छिपा रखा है,
कहते है इन्सान का नसीब होता है जो उसे उन सीपों तक ले जाता है,
जो ये कहते है गलत कहते है,
हर इंसा जो इस दुनिया में है बहुत संघर्ष कर रहा है,
हर कोई रोज रोज नए तरीकों से नए जोश से उन सीपियो को ढूँढने में लगा है,
सीपियो को पाने में कोई अपनी दिशा छोड़ता है कोई गलत रास्ते भी अपनाता है,
उस गरम तपते रेत के उबड खाबड मैदान में हर कोई लगा है,
कोई हार मानकर लौट आते है ,
कोई उन्हें लौटा देखा साथ हो जाते है,
कोई उन्हें लौटा देखा साथ हो जाते है,
कुछ चालाक लोग,
उन लौटते हुए लोगो को देख के नए जोश में आगे बड जाते है,
सोचते है ,
चलो अब लोगो की गिनती कम है सीप मिलने के मौके ज्यादा है,
अब बचे हुए लोगो में से कुछ को अचानक वो गड़े हुए सीप मिलते है,
और वो खुश हो जाते है की नसीब मिल गया,
और वो खुश हो जाते है की नसीब मिल गया,
और साथ चल रहे कुछ लोगो को वो बुरा भी लगता है ,
जिनको नहीं मिला उनकी आँखे भर आई की,
जिनको नहीं मिला उनकी आँखे भर आई की,
मेहनत तो हमने भी की थी ,
धूप में जगे तो हम भी थे,
बारिश में भीगे तो हम भी थे,
धूप में जगे तो हम भी थे,
बारिश में भीगे तो हम भी थे,
पर सीपी हमें नहीं मिला,
जानते है क्यों ?
क्यों की किसी सीपी पे किसी का नाम नहीं लिखा था,
ऊपर वाले ने तो उन्हे सिर्फ छिपाया था,
जो लोग गड़े हुए सीपियो की दिशा में गए उन्हें वो मिला,
और जहा सीपी नहीं था वह थी धूल गरम धूल,
मतलब साफ़ है मेहनत करो आगे बडो किस्मत कुछ नहीं है,
अगर,
दिशा सही पकड़ी है तो आपको मंजिल से कोई हटा नहीं सकता,
-सोलंकी मैंडी
-सोलंकी मैंडी
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