आज तुम्हारी यादें देखो फिर आंसू ले आई हैं,
आकर मेरे दिल में देखो ये कैसे इठलाई हैं,
एक खामोश उदासी तेरी एक मेरा दीवानापन,
लगता था सब हासिल कर लूँ छोटा सा है ये जीवन,
बिना तुम्हारे सब कुछ सूना,दिल भी सूना, संसार भी सूना,
यही अगर अंजाम था फिर तो ऑंखें क्यों मुरझाई हैं,
आज तुम्हारी यादें देखो फिर आंसू ले आई हैं,
हम तो उडते पंछी से थे,ये आकाश हमारा था,
क्यों फिर हमने तुमको अपना, ये तन मन दे डाला था,
अब भी वहीँ खड़े हैं जिन राहों से तुम गुजरा करते थे,
शायद हो दीदार तुम्हारा,नजरें तभी बिछाई हैं,
आज तुम्हारी यादें देखो फिर आंसू ले आई हैं |
-सूरज
-सूरज
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