कितनी अजीब है ये दुनिया कुछ सोचती ही नही,
क्या करता हूँ मै ये पूछती ही नही,
कुछ पूछती है तो,
बस मेरे बीते हुए कल को,
मेरे आगे आने वाले कल को कोई पूछता ही नही,
सब रहते है मेरी कमियां खामियां निकालने में,
मेरे हुनर को तो कोई पहचानता नही,
चल चल के थक चुका हूँ मै,
दो घड़ी बैठने को तो कोई पूछता नही,
सब भरने में लगे है अपनी जेबें,
खाली दोस्ती का हाथ बढाये मुझे कोई दिखता नही,
समझता था कुछ खास हूँ मै सब से,
अब देख खुद की औकात,
मुझे खुद पे भी यकीन होता नही,
कितनी अजीब है ये दुनिया कुछ सोचती ही नही,
क्या करता हूँ मै ये पूछती ही नही .....
-सोलंकी मैंडी
-सोलंकी मैंडी
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