Friday, April 6, 2012

माँ

जब आंखे खोली तो तू थी,
मेरे कोमल हथेली की रखवाली तू थी,
तूने दिया पहला अमृत मुझको,
दिन रात मेरे साथ रहने वाली तू थी,
मेरे तो सोने का न दिन था न रात थी,
मेरे लिए तो हरदम जागी वो तू थी,
किसी ने देखा न देखा,
मेरे हर कदम की निशानी पे तू थी,
सिर से पैरों तक मैं तो वेसा ही था,
मेरे रंगत को रंग देने वाली तू थी,
हर खुशी और हर गम में रहा न रहा कोई,
मेरे तो हर पल में भागीदार तू थी,
तू रहे न रहे पास मेरे,
मेरे हर लम्हे में साथ रहने वाली माँ तू थी.....
-सोलंकी मैंडी

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