आज फिर मन कुछ अनमना सा है,और रात कुछ अनींदी सी, और जैसा की मैंने पिछली बार कहा था की फिर मिलेंगे किसी अनींदी रात में, तो मैं फिर हाजिर हूँ, दोस्तो, आज मैं यादों के बारे में बात करना चाहूँगा, आप भी किसी न किसी को कभी न कभी तो याद करते ही होंगे, किसी को भी, आपका कोई पुराना दोस्त, आपका पुराना स्कूल, कोई किताब जो आपने कभी पढ़ी हों, या उसका कोई पात्र, जो आपको अपनी तरह लगने लगता है, आपकी सबसे प्यारी दोस्त, जिससे आप सब कुछ बांटते थे, आपकी छोटी बहन जो आपसे दूर है, उससे लड़ना,जो अब शाम को फोन पर ही हो पाता है, आपकी माँ, जो अभी भी आपको घर से निकलने पर ये सलाह देती हैं, बेटा किसी अनजान से दोस्ती मत करना, किसी पे ज्यादा भरोसा मत करना, खाना समय से खाना, या आपका कोई निर्णय जिसने सब कुछ तो नहीं पर काफी कुछ बदल दिया, वो पहली नजर का प्यार, वो दोस्तों से लड़ाई झगडा, मार पीट, कॉलेज बंक कर के फिल्म देखने जाना, होस्टल में वही सब करना जो अनुशासनहीनता में आता है, कोई गाना, जो खास कर आशिकी के दिनों में आपके फोन के म्यूजिक प्लयेर के शफल पर या किसी रेडियो स्टेशन पर अपने आप ही आ जाता है, और लगने लगता है की ये गाना तो मेरे लिए ही लिखा गया है..........और भी बहुत कुछ, यादों में तो सब कुछ आ जाता है, कुछ यादें अच्छी होती हैं, कुछ बुरी | कुछ को हम जल्दी से जल्दी भूलना चाहते हैं, कुछ हमें बहुत रुलाती हैं पर हम चाहते हैं की हम उन्हें कभी न भूलें | क्यों आती हैं ये यादें, क्यों परेशान होते हैं हम कुछ यादों से, क्यों सब के बीच में होकर भी अकेले हों जाते हैं हम.....ये सवाल अक्सर मेरे दिमाग में आते हैं, मेरी भी कुछ ऐसी ही मिली जुली यादें हैं सबकी तरह, दोस्तों की, किसी खूबसूरत सी चुलबुली लड़की की, किसी काफी कुछ बदलने वाले निर्णय की,गानों की, माँ की और मेरी प्यारी बहन से लड़ाई की | मुझे लगता है यादें इंसान की बहुत अच्छी दोस्त होती हैं, और दुश्मन भी | बस आपके ऊपर निर्भर करता है की आप इन्हें किस तरह से लेते हैं, दोस्त की तरह या दुश्मन की तरह | यादें हमें सहारा देती हैं, यादें हमारे अकेलेपन को खतम करती हैं, यादें हमारे रिश्तों को मजबूत करती हैं, यादें हमें रुलाती हैं, यादें हमें हसाती हैं, आज किसी याद से ही शायद मन अनमना सा है, पर क्यों है ये नहीं पता, नहीं किसी लड़की का चक्कर नहीं है, ना ही किसी ने मेरे साथ कुछ बुरा हुआ है, बस यूँ ही, मुझे लगता है की ऐसा सब के साथ होता होगा, जब बिना किसी बात के, बिना किसी याद के, मन अनमना हों जाता होगा | अब मेरी आँखों में हलकी हलकी नींद की खुमारी छा रही है, बेहतर यही होगा की सो जाऊं, क्या पता सपने में कोई परी ही आ जाये, मेरा मन बहलाने के लिए, बस चलता हूँ दोस्तों, हर बार की तरह फिर मिलूंगा किसी अनींदी रात में, फिर कोई आप बीती लेकर, जो सिर्फ मेरी ही कहानी नहीं होगी, उस कहानी में आप भी होंगे......

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