Sunday, January 8, 2012

उजाला

एक आग उठी है इस दिल में,
दिल कहता है कुछ कर जाऊं,
इन सोती जगती रातों के,
सपनो में रंग मैं भर जाऊं,
अल्हड अलबेले इस पल के,
जाने अनजाने उस कल के,
रातें जो काटी जल जल के,
इन सब को मैं झुठला जाऊं,
इन सोती जगती रातों के,
सपनो में रंग मैं भर जाऊं,
एक गीत बुना है इस मन ने,
इस रंग बदलते मौसम ने,
छेड़े हैं तार नयी धुन में,
इस धुन को जीवन दे जाऊं,
इन सोती जगती रातों के,
सपनो में रंग मैं भर जाऊं,
ये कैसा नया उजाला है,
सब कुछ उजला कर डाला है,
न गोरा है न काला है,
सब रंगभेद झुठला जाऊं,
इन सोती जगती रातों के,
सपनो में रंग मैं भर जाऊं||
-सूरज

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