तेरे आँचल से बढ़कर कोई शामियाना नहीं,
तेरी जानिब से हटकर मेरा कोई ठिकाना नहीं,
ऐ माँ, हर रोज सोचता हूँ की कुछ लिखूं तुझपर,
पर मेरी कलम में शायद वो आशिकाना नहीं....
-सूरज
तेरी जानिब से हटकर मेरा कोई ठिकाना नहीं,
ऐ माँ, हर रोज सोचता हूँ की कुछ लिखूं तुझपर,
पर मेरी कलम में शायद वो आशिकाना नहीं....
-सूरज
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