Wednesday, January 11, 2012

माँ

ऐ माँ, तुझसे बढ़कर इबादत नहीं कोई,
तेरी चाहत से बढ़कर चाहत नहीं कोई,
ये जहाँ तुझसे ही मिलकर तो ख़ूबसूरत है,
तेरी आहट के सिवा दूसरी आहट नहीं कोई,
ये सारी बारिशें तुझसे ही तो जन्मी है,
और ये आसमाँ तुझसे ही तो नीला है,
तुझसे ही आई पानी में नमी भी है,
तेरी जैसी दूजी आयत नहीं कोई,
ऐ माँ, तुझसे बढ़कर इबादत नहीं कोई,
तेरी चाहत से बढ़कर चाहत नहीं कोई||
-सूरज

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