Tuesday, January 31, 2012

थोडा था

जमी भी थोड़ी थी आसमा भी थोडा था
पर पाने को हमने ये जहान भी थोडा था
बचपन छोड़ा था घर छोड़ा था खुशियों का दामन हमने छोड़ा था
सब सीधे दौड़े थे मैं उल्टा दौड़ा था
सब कुछ पाने के लालच में जाने क्या क्या छोड़ा था
कुछ हिम्मत थोड़ी थी तजुर्बा थोडा था
सहने को उन सब बातो को मेरे उम्र का दम जरा थोडा था
हांथो में किस्मत थोड़ी थी सीने में जज्बा थोडा था
पर पाने को हमने ये जहान भी थोडा था
थोडा सा कुछ मैं सोया था थोडा सा कुछ मैं रोया सा
ये भी मुझको पाना था वो भी मुझको पाना था
जमी भी थोड़ी थी आसमा भी थोडा था
पर पाने को हमने ये जहान भी थोडा था.....
-सोलंकी मैंडी

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