ये जो रंजो गम की सियाही है,
जो तुमने अपने रुखसार पे सजाई है,
क्यों ना इसे हम चुपके से हटा दें,
तुम्हारे चेहरे पर थोड़ी मुस्कान सजा दें,
ये जो मेरा अंदाज़ आशिकाना है,
यही तो तुम्हारी आँखों में बसाना है,
आओ तुम्हारे गम हम चुरा ले,
तुमको यूँ कहीं दिल में बसा लें,
ये जो खामोश तिश्नगी तुम्हारी है,
कुछ भी हो पर बहुत प्यारी है,
इन्हें और भी संजीदा बना दें,
तुमको हम तुम्ही से चुरा लें.....
-सूरज
जो तुमने अपने रुखसार पे सजाई है,
क्यों ना इसे हम चुपके से हटा दें,
तुम्हारे चेहरे पर थोड़ी मुस्कान सजा दें,
ये जो मेरा अंदाज़ आशिकाना है,
यही तो तुम्हारी आँखों में बसाना है,
आओ तुम्हारे गम हम चुरा ले,
तुमको यूँ कहीं दिल में बसा लें,
ये जो खामोश तिश्नगी तुम्हारी है,
कुछ भी हो पर बहुत प्यारी है,
इन्हें और भी संजीदा बना दें,
तुमको हम तुम्ही से चुरा लें.....
-सूरज
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