Tuesday, January 31, 2012

एक मोड़

ऐसे मोड़ पे आके रुका हूँ मै जहाँ हर और मोड़ ही दिखाई देते है,
किसी ने कहा था मुझसे की तू बहुत आगे तक जायेगा,
मुझे तेरा कल दिखाई देता है,
कुछ हौसला था खुद पे कुछ विश्वास था उसकी बात पे,
चल दिए हम फिर अपनी राह पे कुछ अजीब हुआ इक रोज,
कुछ अजीब सुना एक शोर,
की दूर है तेरी मंजिल हाय तू चल पड़ा किस और,
एक पल को नजर ठिठक गई दिल भी यु सहम गया,
जब आ गया वो मोड़ जहाँ हर ओर दिखा है मोड़,
अब जाये तो जाये कहाँ सब बंद दिखा हर ओर,
जहन में से बात उठी की,
मुझे तेरा कल दिखाई देता है,
अगर उसे मेरा कल दिखाई देता है तो मुझे अब हल दिखाई देता,
ये जो जिंदगी है हर राह में तुम्हे डरायेगी कुछ नए सवाल उठायेगी,
हँसते गाते कभी रोते गाते ये जिंदगी यु ही कट जायेगी,
ये किसी के हाँथ न आएगी ये सब को यु ही चलायेगी,
कुछ नए पैगाम सुनाएगी,
जब मोड़ मिले हर ओर तो चिंता देना छोड़ की,
हर मोड़ होगी राह बनी वहाँ भी होगी कुछ बात नई,
ये राह कहीं तो जायेगी मुझे मंजिल तक ले जायेगी,
हर मोड़ पे ये मुड जायेगी पर मंजिल अपनी आयेगी.....
-सोलंकी मैंडी

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