Tuesday, February 7, 2012

वक्त

उस रात चांद भी फलक पे पूरा था,
फिर भी मेरे घर अंधेरा था,
हौसलों की कमी नहीं थी मगर,
वक्त ने यूँ बेवक्त आ कर घेरा था.....
-सोलंकी मैंडी

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