सवा लाख हाँथ उठते है मेरे एक हाँथ के साथ,
यूँ ही तो नहीं,
कुछ तो बात होगी मेरे में,हर एक में वो बात नहीं मिलती,
लाखो निगाहे देखती है मुझे,
हर नजर में मेरी एक अलग पहचान होती है,
कुछ अलग जादू है मेरी आवाज में,
यूँ ही तो नहीं,
हलचलें हर दिल में हजार होती है,
लड़खड़ाते है कदम मेरे कदम के साथ चलने में,
मेरे वजूद में कुछ बात तो जरूर होगी,
मुस्कुराहटे आती है चहुँ ओर मेरे एक मुस्कान से,
यूँ ही तो नहीं,
इतनी आसानी से खुशिया बार बार नही फैलती ,
भीड़ उमडती है मेरे दीदार की एक झलक पाने को,
यूँ ही तो नहीं,
एक इशारे पे महफिले हर बार नहीं सजती,
आज भी ढूँढ़ते है लोग मेरी परछाइयों को,
यूँ ही तो नहीं,
इतनी आसानी से मेरी यादे नहीं मिटती,
कुछ तो बात होगी मेरे में ,हर एक में वो बात नहीं मिलती.....
-सोलंकी मैंडी
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