कुछ उम्मीद के परिंदे अभी कैद है पिंजरे में,
ऐसे कैसे उन्हें उड़ जाने दू अभी,
कुछ दिल में दर्द है आंसू में कैसे बह जाने दू उन्हें,
खोने को कुछ ना रहा ,पाने का दामन कैसे छूट जाने दू अभी,
हांथो में कुछ लकीरे बनी है,तकदीर का साथ कैसे छूट जाने दू अभी,
मौत तो सबको आनी है एक न एक दिन,
जिंदगी का दामन केसे छूट जाने दू अभी.....
-सोलंकी मैंडी
-सोलंकी मैंडी
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