अनकही
अभिव्यक्ति अनकहे विचारों की.....
Tuesday, March 13, 2012
फ़साना
कुछ कहती सी है ये खामोशियाँ मुझसे ,की इन पलों को उधार ले लो
,
संगीनिया लब्जों की,बातो के फनकार को ,होंठो का जाम पीने दो,
ठहर जाये ये अनगिनत अनछुए लम्हे इस किनारों पर कुछ इस क़दर,
की मैं खुद की जिंदगी का एक और फ़साना कह जाऊं......
-सोलंकी मैंडी
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