Friday, March 16, 2012

रुपैया

सदा खाकी खादी सबको मंगता गाँधी है,
लोलीपॉप से लैपटॉप तक सबकी बदौलत गाँधी है,
कागज पे जो चिपके सब कुछ बदलता ये गाँधी है,
२ अक्टूबर को भूल जाते है युही पर उंगलियों पे गिना जाये वो गाँधी है,
होटल से मोटेल ,स्कूल से कॉलेज ,नौकर से चाकर सब के दिमाग में घूमता गाँधी है,
छाप के देखा कईओ ने खुद से,
कही न चल पाया वो गाँधी है,
बाप न जाने रिश्ता ना जाने सबसे ऊपर गाँधी है,
दो जहा की सैर करा दे ,कही किसी को खाक दिलादे वो भी अपना गाँधी है,
न्याय से अन्याय तक ,खुसी से गम तक,
जन्मदिन से कफ़न तक इन सब के पीछे गाँधी है|
-सोलंकी मैंडी

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