Saturday, May 12, 2012

अब बड़े हुए है ऐसे की....

अब बड़े हुए है ऐसे की कुछ बाते करना भूल गए ,कुछ हसरत करना भूल गए ,
बचपन का जीना भूल गए ,कुछ लम्हे सुनहरे भूल गए ,
मोमबती जलती है कोने में अब ,
पर परछाईयो के मोर बनाना भूल गए, कुछ हिरन बनाना भूल गए ,
जलती मोमबती की लौ में हाथ फिराना भूल गए ,कुछ कागज जलाना भूल गए ,
कुछ कदम बढ़ गए आगे यू की ,
पैर छुआ के दीवारों पे निशान बनाना भूल गए,कलामुंडिया लगाना भूल गए ,
सब होते है बिस्तर पर भी ,पर पैरों पे झूले भूल गए,वो अक्कड बक्कड भूल गए,
घूम चुके IIM में,घूम चुके है IIT में पर स्कूल की घंटियाँ भूल गए,वो पानी के मटके भूल गए,
हर साल ही आता १५ अगस्त ,गणतंत्र दिवस हर बार मनाया जाता है
पर वो कागज की पतंगी भूल गए,वो माइक की कू कू भूल गए,
वनीला स्ट्राबेरी खाते है,बर्गर पिज्जा खाते है,
पर वो मटके की कुल्फी भूल गए,वो चाट पड़ाके भूल गए,
कोंट्रा मारियो जानते है,स्ट्रीट फाइटर जानते है,
पर वो पतंग उडाना भूल गए,वो पेच लडाना भूल गए,वो गली में खो खो भूल गए,
हर बंदा बचता है एक दूजे से ,सब नजर चुराए जाते है,
पर वो लुक्का छुप्पी भूल गए,वो पोसमपा गाना भूल गए,
दुनिया की गपशप करते है,हर एक की बाते करते है,
पर वो खुद की बाते भूल गए,बचपन की शरारत भूल गए....

- सोलंकी मैंडी

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