अनकही
अभिव्यक्ति अनकहे विचारों की.....
Wednesday, February 15, 2012
आगोश
घडी दो घडी जो पनाह मिल जाती गर तेरे आगोश में
तो मर जाना भी सुकून से नसीब होता मुझे.....
-सोलंकी मैंडी
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