उठ भोर में नहाय लियो सिर तेल लियो चिपकाय,
चाय पराठा खाय के लियो पेट डकराय,
चढ साइकिल में निकलियो पहुचो दवार अगार,
बीबी ठाडी दवार पे ,फिर में दियो देख मुस्काय,
बालक साइकिल पीछे भाजे ,फिर दियो मैं रेस बड़ाय,
डब्बा हेंडल आगे लगे ,फिर बेलेंस दियो बिगार,
खडडा आगे ब्रैक न लागे ,मैं खडडा गयो गिराय,
बालक ठाड़े ठाड़े हँसे ,मैं सरम से गयो लजाय,
पहुच घरे फिर बालक मारे,दियो बीबी को खूब सुनाय,
याई से मेरो टाइम कट गयो , लियो आज में खूब सुआय....
-सोलंकी मैंडी
-सोलंकी मैंडी
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